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मनुष्य: स्वयं का भविष्य दृष्टा?

धरती के सभी योनियों में मनुष्य योनि ऐसी है जो आने वाले कल की कल्पना ही नहीं करता बल्कि कल के बारे में बहुत कुछ पहले से जानता है और समझता है और शायद ही कोई अन्य जीव स्वयं के इस सच्चाई का भविष्य दृष्टा होगा कि मौत एक अंतिम सत्य है जिससे हर किसी को गुजरना ही है फिर भी मनुष्य के सारे कर्म इसी भाव से होता रहता है यह एकदम स्थाई है। और यही शायद माया है। आपा धापी चाहे जितनी ज्यादा होगी परंतु समय अपनी यात्रा में अनवरत गतिमान है। आज प्रो अनिल कुमार शुक्ला से अपने पद प्रमोशन के स्क्रीनिंग कमेटी के मीटिंग के दौरान मुलाकात हुए वो सब्जेक्ट एक्सपर्ट के रूप में आज मौजूद थे। बातों ही बातो में उन्होंने एक दार्शनिक बात कही कि शरीर में चल रही अनन्त रिएक्शन में से न जाने कब कौन सा रिएक्शन बंद हो जाए और फिर सारा खेला खतम हो जाए? हालांकि बातों का सिलसिला और भी चला परंतु उक्त कथन में गूढ़ सच्चाई थी।

सत्य से परिचय

यह भी नहीं रहने वाला 〰️〰️🔸〰️🔸〰️〰️ एक साधु देश में यात्रा के लिए पैदल निकला । रात हो जाने पर एक गाँव में आनंद नाम के व्यक्ति के दरवाजे पर रुका आनंद ने फकीर की खूब सेवा की। दूसरे दिन आनंद ने बहुत सारे उपहार देकर विदा किया। फकीर ने आनंद के लिए प्रार्थना की  - "भगवान करे तू दिनों दिन बढ़ता ही रहे।" फकीर की बात सुनकर आनंद हँस पड़ा और बोला - "अरे, फकीर ! जो है यह भी नहीं रहने वाला।" फकीर आनंद की ओर देखता रह गया और वहाँ से चला गया। दो वर्ष बाद फकीर फिर आनंद के घर गया और देखा कि सारा वैभव समाप्त हो गया है। पता चला कि आनंद अब बगल के गाँव में एक जमींदार के यहाँ नौकरी करता है। फकीर आनंद से मिलने गया। आनंदने अभाव में भी फकीर का स्वागत किया। झोंपड़ी में फटी चटाई पर बिठाया। खाने के लिए सूखी रोटी दी। दूसरे दिन जाते समय फकीर की आँखों में आँसू थे। फकीर कहने लगा - "हे भगवान् ! ये तूने क्या किया ?" आनंद पुन: हँस पड़ा और बोला - "फकीर तू क्यों दु:खी हो रहा है ? महापुरुषों ने कहा है कि भगवान्  इन्सान को जिस हाल में रखे, इन्सान को उसका धन्यवाद करके खुश रहना चाहिए ।...