धरती के सभी योनियों में मनुष्य योनि ऐसी है जो आने वाले कल की कल्पना ही नहीं करता बल्कि कल के बारे में बहुत कुछ पहले से जानता है और समझता है और शायद ही कोई अन्य जीव स्वयं के इस सच्चाई का भविष्य दृष्टा होगा कि मौत एक अंतिम सत्य है जिससे हर किसी को गुजरना ही है फिर भी मनुष्य के सारे कर्म इसी भाव से होता रहता है यह एकदम स्थाई है। और यही शायद माया है। आपा धापी चाहे जितनी ज्यादा होगी परंतु समय अपनी यात्रा में अनवरत गतिमान है। आज प्रो अनिल कुमार शुक्ला से अपने पद प्रमोशन के स्क्रीनिंग कमेटी के मीटिंग के दौरान मुलाकात हुए वो सब्जेक्ट एक्सपर्ट के रूप में आज मौजूद थे। बातों ही बातो में उन्होंने एक दार्शनिक बात कही कि शरीर में चल रही अनन्त रिएक्शन में से न जाने कब कौन सा रिएक्शन बंद हो जाए और फिर सारा खेला खतम हो जाए? हालांकि बातों का सिलसिला और भी चला परंतु उक्त कथन में गूढ़ सच्चाई थी।