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बेसिक शिक्षा में सुधार हेतु मेरे द्वारा दिए गए सुझाव

1. ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों को विशेष प्रोत्साहन भत्ता या अधिक HRA दिया जाए, जबकि शहरी क्षेत्र में HRA कम रखा जाए। इस व्यवस्था से शिक्षक गाँव में रहने के लिए उत्साहित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।

2. गाँव में कार्यरत शिक्षकों को मुफ्त आवासीय सुविधा प्रदान की जाए।

3. शिक्षकों का ट्रांसफर प्रायारिटी के आधार पर उनके मनचाहा स्थान पर देने की कोशिश हो। और ट्रांसफर व्यवस्था लॉक ना हो यह हर साल होनी चाहिए।

4. शिक्षकों के बच्चों को सरकारी विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा की गारंटी दी जाए।

5. स्कूलों की गुणवत्ता और सुविधा में सुधार हेतु प्रत्येक विद्यालय को अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित क्लासरूम, पुस्तकालय और अन्य संसाधनों से लैस किया जाए।

6. सरकारी विद्यालयों के बच्चों के ड्रेस कोड निर्धारण की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन और प्रबंधन को सौंपी जाए, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय लिया जा सके।

7. प्रत्येक विद्यालय में सफाईकर्मी की उपस्थिति विद्यालय समय में अनिवार्य हो तथा एक क्लर्क स्तर का संविदा कर्मचारी नियुक्त किया जाए, जिससे शिक्षक प्रशासनिक कार्यों से मुक्त होकर शिक्षण कार्य पर केंद्रित रह सकें।

8. गुणवत्ता मूल्यांकन (Quality Assessment): सभी स्तरों पर विद्यार्थियों की प्रगति मापने हेतु राज्य स्तरीय स्टैंडर्ड असेसमेंट टेस्ट आयोजित किए जाएं, जिससे शिक्षण गुणवत्ता का पारदर्शी आकलन हो सके।

9. डिजिटल सशक्तिकरण: ग्रामीण विद्यालयों में हाई-स्पीड इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम सुविधा सुनिश्चित की जाए।

10. शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training): प्रत्येक शिक्षक को तीन वर्ष में कम से कम एक बार नवीनतम शिक्षण पद्धति, ICT टूल्स और NEP-2020 आधारित प्रशिक्षण दिया जाए।

11. गाँव आधारित शिक्षा मॉडल: प्रत्येक गाँव में मिनी लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स सेंटर विकसित किए जाएं, जिनका संचालन गाँव के सरकारी विद्यालय द्वारा किया जाए, ताकि शिक्षा केवल अकादमिक तक सीमित न रहकर समग्र विकास का माध्यम बन सके।

12. शिक्षकों की डिजिटल मॉनिटरिंग, अटेंडेंस ऑनलाइन केंद्रीयकृत वर्तमान व्यवस्था में सुधार किया जाए। इमरजेंसी, प्रतिकूल मौसम, बैंकिंग आदि के कारण लेट आने पर शिथिलता बरती जाए। इसे हमेशा आपराधिक कृत्य की भांति न देखा जाए।

13. प्रायः किसी भी विभाग का अधिकारी बेसिक शिक्षकों की क्लास लेने और स्कूलों की समीक्षा करने के लिए पहुँच जाता है। यह उचित नहीं है। शिक्षक सर्वोपरि होता है। प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए PCS/IAS परीक्षा पास करने के बराबर का विद्वता होना जरूरी नहीं है, बल्कि बच्चों के साथ व्यावहारिक शैक्षणिक कौशल की निपुणता आवश्यक है। इसलिए स्कूल की समीक्षा केवल शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी या माध्यमिक/उच्च शिक्षा विभाग के प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा ही कराई जाए।

14. शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर आकलन तय करके न्याय पंचायत, ब्लॉक, तहसील, जिला, मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार दिया जाए।

15. व्यक्तिगत या सामाजिक किसी भी स्तर पर यदि शिक्षक किसी अन्य विभाग में अधिकारी के पास वार्ता के लिए जाएँ, तो उन्हें सम्मान के साथ वरीयता दी जाए। प्रशासनिक कर्मचारी अधिकारी को इस संस्कृति के पालन हेतु निर्देशित करें। शिक्षक भी इस परंपरा का दुरुपयोग न करें।

16. बेसिक शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति डायरेक्ट न होकर बल्कि इसी विभाग में कार्यरत जिले का सबसे वरिष्ठ शिक्षक को 3 वर्ष के लिए रोटेशन आधारित नियम से होनी चाहिए। क्योंकि शिक्षक ही शिक्षा और शिक्षक समस्याओं के समाधान को ज्यादा समझ सकता है।


डा. अखिलेश मोदनवाल
असिस्टेंट प्रोफेसर, रसायन विज्ञान
पी बी पी जी कॉलेज, प्रतापगढ़
संयुक्त मंत्री, प्रसुऑक्टा, प्रयागराज

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